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Showing posts from July, 2022

भारत में हरियाली तीज मनाये जाने का कारण व् वास्तविक तरीका

  कृषि प्रधान देश होने के कारण भारत में हर बो त्यौहार जो प्रत्येक गाँव में प्राचीन समय से मनाया जाता है वो किसान कौम के द्वारा ही प्रारम्भ किया गया है ।  यह बात अलग है की भारत में जब से किसान कौम की वैचारिक व् समाजिक ताकत कमजोर हुई है तब से इन सब त्योहारों के पीछे मनगड़ंत कहनियाँ भारत में पाखंडियों ने अपनी कमाई के अनुसार बना ली उसमे चाहे दीपावली होली जैसे बड़े त्यौहार भी शामिल हैं                       इसी क्रम में हरियाली तीज का त्यौहार जो सावन महीने की सौन्द्रियता व् किसानो के खाली समय से जुड़ा था उस पर पाखंडियों ने तमाम गप्प से भरी कथाएं समाज में प्रचलित कर दी इसमें अगर कोई कथा सत्य भी मान ली जाए तो यह हमे नही भूलना चाहिए की हरियाली तीज का त्यौहार उस कथा में वर्णित घटना से पूर्व भी मनाया जाता रहा है | आइये आज आपको हरियाली तीज का वैदिक व् कृषि आधारित महत्व बताते हैं.................                         प्राचीन काल से ही भारत मे महिलाओं द्वारा हरियाली तीज का पर्...

समाज एवं सम्प्रदाय में क्या अन्तर हैं। जानिए और समझिये

  Rajesh Dhull सभी सम्प्रदाय - व्यक्ती, परिवार ,वर्ग, समाज एवं स्थानीय संस्कृतियों के विरुद्ध - वैचारिक, बौधिक, दार्शनिक, महापुरूषों एवं आध्यात्मिक गुरुओ के नाम पर  राजनैतिक साजिशों के दल हैं।  यह सभी हमेशा समाज से अलग अस्तित्व बनाने के प्रयास में रहते हैं।  यह वैसा हैं जैसे समाज रूपी सागर से कुछ जल लेकर तालाब बनाकर खुद को सागर से भी बड़ा बताना।  जबकि ऐसा कभी भी सम्भव नहीं हैं।  यह प्रयास कभी भी किसी भी सम्प्रदाय का पूर्ण नहीं हो सकता - जबकि समाज अपने आप मे पूर्ण हैं। क्योंकि समाज का निर्माण किसी व्यक्ती विशेष के द्वारा नहीं बल्कि , सभी परिवार, सभी वर्ग मिलकर समाज का सामुहिक अस्तित्व हैं। इसके विपरित सम्प्रदाय केवल कुछ लोगों के द्वारा निर्मित संगठन हैं मात्र हैं।   समाज मे प्रत्येक व्यक्ती ,वर्ग स्वतन्त्र होता हैं  सम्प्रदाय में लोगों को प्रत्येक सम्प्रदाय के अलग अलग निराधार असत्य अव्यवहारिक नियमो द्वारा गुलाम मानसिकता के दायरे मे रखने का प्रयास होता हैं जो कभी भी पूर्ण नहीं होता - यानी उस सम्प्रदाय में शामिल लोग उन नियमो का पालन नहीं कर पाते...

भारत के दो बड़े उद्योगपतियो में होगी बड़ी भिड़ंत अडानी vs अंबानी

  नीलामी में होगा अडानी-अंबानी के बीच मुकाबला, सरकार को होगा बड़ा फायदा उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) की एंट्री से 5G स्पेक्ट्रम (Spectrum) नीलामी काफी दिलचस्प रहने वाला है. स्पेक्ट्रम के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों में केवल अडानी ग्रुप ही अकेली ऐसी कंपनी है को सीधे तौर पर टेलिकॉम सर्विसेज से नहीं जुड़ी है. लेकिन स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाने से अब सरकार को ज्यादा रेवेन्यू मिलने का अनुमान है. सरकार को बेहतर रेवेन्यू मिलने का अनुमान टेलिकॉम सेक्टर (Telecom Sector) को नई तकनीक यानी 5G से लैस करने के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी 26 जुलाई से शुरू होगी और इसमें कुछ फ्रीक्वेंसी बैंड के लिए आक्रामक बोली लगाई जा सकती है. इस बार स्पेक्ट्रम की नीलामी अडानी डेटा नेटवर्क के रेस में शामिल होने से ज्यादा दिलचस्प हो गई है. अडाणी समेत कुल 4 कंपनियां स्पेक्ट्रम की नीलामी में शामिल होने जा रही हैं. इनमें रिलायंस जियो 55 से 60 हजार करोड़ रुपये की कीमत के स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाने का अनुमान है.  वहीं भारती एयरटेल 45 से 50 हजार करोड़ और अडाणी 13 से 15 हजार करोड़ कीमत के स्पेक्ट्रम के लिए बोली...

आशिकाना मिजाज में ललित मोदी सुष्मिता ने 11 वाँ पार्टनर अपनाया

 करोड़ों के घोटाले में भगोड़ा घोषित ललित मोदी और मिस यूनिवर्स रह चुकीं सुष्मिता सेन मालदीव और सार्डिनिया में डेटिंग कर रहे हैं.  ख़ुद ललित मोदी ने अपनी फ़ोटो ट्वीट कीं. इसलिए इन्हें गॉसिप तो नहीं कहा जा सकता. मानसून की बेरुख़ी का दंश ललित मोदी (Lalit Modi) और सुष्मिता सेन के रोमांस ने हल्का कर दिया है. जब से इन दोनों की डेटिंग की फ़ोटो वायरल हुई हैं, हर एक की ज़ुबान पर इन दोनों की ही चर्चा है. करोड़ों के घोटाले में भगोड़ा घोषित ललित मोदी और मिस यूनिवर्स रह चुकीं सुष्मिता सेन मालदीव और सार्डिनिया में डेटिंग कर रहे हैं. ख़ुद ललित मोदी ने अपनी फ़ोटो ट्वीट कीं. इसलिए इन्हें गॉसिप तो नहीं कहा जा सकता. अपने पहले ट्वीट में मालदीव और सार्डिनिया के बीच पर सुष्मिता के साथ एक अंतरंग मुद्रा की तस्वीर टैग करते हुए उन्होंने सुष्मिता को बेटर हाफ़ लिखा था. और बताया कि मालदीव और सार्डिनिया में छुट्टियाँ बिता कर वे लंदन लौट आए हैं. किंतु बाद में लिखा हम लोग डेटिंग पर हैं, शादी बाद में करेंगे. 59 के ललित 47 की सुष्मिता दूसरी तरफ़ सुष्मिता ने एक ट्वीट किया था कि वे अपनी बेटियों के साथ मालदीव में...

मेटावर्ष नाम से बन रही है नई दुनिया क्या जानते हैं आप क्या है ये

  मेटा वर्ष क्या है? Metaverse in Hindi मेटा वर्ष क्या है? Metaverse in Hindi Metaverse kya hota hai?                  दुनिया दिन प्रतिदिन बदलती जा रही है जो चीजें 20 साल पहले थी वह आज नहीं है और जो आज है वह 20 साल बाद नहीं होंगी या फिर उनमें कुछ और बदलाव मिलेगा लेकिन दुनिया बदलने में सबसे बड़ी क्रांति जो लाया है वह है “इंटरनेट” इंटरनेट आने से बहुत ज्यादा चीजें आसान हो गई है इंसानी भागदौड़ भी कम हो गई है उनमें से कुछ के उदाहरण मैं आपको नीचे दे रहा हूं इंटरनेट आने से पहले किसी भी जानकारी के लिए बड़ी-बड़ी बुक पढ़नी पड़ती थी लेकिन अब आप 1 सेकंड के अंदर इंटरनेट के द्वारा कोई भी जानकारी ले सकते हैं  इंटरनेट आने से पहले पैसों के लेनदेन के लिए इंसान को एक दूसरे के पास जाना होता था लेकिन अभी आप 1 सेकंड के अंदर पैसों को एक दूसरे के पास भेज सकते हैं इंटरनेट आने से पहले किसी भी जानकारी देने के लिए चिट्ठी भेजी जाती थी लेकिन अब 1 सेकेंड के अंदर आप मैसेज(मेल) भेज कर वह सारी इनफार्मेशन दे सकते हैं एक और क्रांति इंटरनेट लाया वह है डिजिटल करंसी जी ह...

अंग्रेज और मुगलों से लड़ने वाली खाप पंचायत की सच्चाई जानते हो आप...?

वास्तव में भाईचारा एक सभ्यतागत गुण है जो भारतीय समाज का सदा से आधार रहा है। नृशास्त्री कहेंगे कि जाति के रूप में जाट किसी मूल व्यक्ति के परिवार का विस्तार ही हैं और जाटों के सभी गोत्र बढ़ते गए मूल परिवार की शाखाएंए प्रशाखाएं ही हैं इसलिए उनके बीच बंधुत्व की भावना जनजातियों के बीच पाई जाने वाली बंधुत्व की भावना से भिन्न नहीं है। पर खाप पंचायतों का भाईचारा ऐसा नहीं है यह बात तो इसी से सिद्ध है कि यह भाईचारा केवल जाटों तक सीमित नहीं है। खाप के भीतर भी सभी जातियों के बीच भाईचारे का ही सबंध है। लेकिन एक जाति के रूप में जाट किसी एक मूल परिवार का विस्तार हैं  यह धारणा भी सही नहीं है। जाटों के उद्भव के बारे में उनके बीच प्रचलित जो सबसे प्रसिद्ध मान्यता है, वह यह है कि वे भगवान शिव की जटाओं से उत्पन्न हुए हैं। जाट सामान्यतय शैव हैं और शिव की जटाओं का यह रूपक उनके बारे में बहुत सार्थक है। जैसा कि पाणिनी के धातुपाठ से स्पष्ट है जाट संज्ञा समूह के अर्थ में प्रयुक्त होती थी।                                  ...

शिवाजी महाराज या औरंगजेब में भारत का बड़ा 'हीरो' कौन, दोनों का एक साथ हीरो बनना क्यों असंभव है...........?

मध्यकालीन इतिहास ने आज के भारत के सामने एक बहुत ज्यादा परेशान करने वाला और चिंताजनक सवाल खड़ा कर दिया है. खासकर ज्ञानवापी विवाद के बाद सवाल से जुड़े खतरनाक नतीजों की आशंका परेशान कर रही है. दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. और शहरी भारत में एक भय का माहौल नजर आने लगा है. छत्रपति शिवाजी महाराज और औरंगजेब में भारत का हीरो कौन हो सकता है? किसी विकल्प या तुलना में औरंगजेब बार-बार क्यों आ रहा है, अब इस ओर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से देखने की सख्त जरूरत है. या फिर भविष्य में भड़काऊ चीजों से बचने के लिए संसद एक क़ानून बनाकर औरंगजेब को हीरो घोषित कर दे. समूचा देश उसे मान लेगा. जब सार्वजनिक और आधिकारिक रूप से देश में औरंगजेब को हीरो नहीं माना जाता फिर इतना भ्रम बार-बार लगातार क्यों उपज रहा है भला? क्या इसकी वजह मुग़ल बादशाह का धर्म है. या फिर इसके पीछे भूगोल और दूसरी वैज्ञानिक चिंताएं हैं. देश के जिम्मेदार नेताओं का तो नहीं पता. लेकिन मुझे लगता है कि धर्म वजह नहीं है. ऐसा होता तो निकहत जरीन के बहाने एमसी मैरिकॉम पर निशाना नहीं साधा...