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भारतीय संत परम्परा की बर्बादी

ॐ कृण्वन्तो विश्वमार्यम ॐ



गुरुमीत राम रहीम , रामपाल , आशाराम व कई संत जेल की सलांखो में आज पहुच गये हैं क्षमा चाहता हूँ मेने इन राक्षसों के लिए संत शब्द इस्तमाल किया ये तो दानव हैं...... 
परन्तु इन दानवों की लिस्ट काफी लम्बी है और फिलाल में जो दानव बड़े स्तर पर चमके हुए हैं वो हैं निर्मल बाबा और राधे माँ???
तो आइये कुछ झलक हम डालते हैं पुराणी भारतीय संस्क्रती के उन महान ऋषियों पर जिनकी बजह से हम बड़े गर्व से  कहते हैं की हम ऋषियों के वंशज हैं........ जैसे की महर्षि पतंजली, वाग्भट्ट जी,श्री अरविन्द घोष,ऋषि दयानन्द जी, ये लिस्ट बहुत लम्बी हैं पर इन्होने अपने जीवन को आदर्श के मूल्यों पर जिया और भारतीय आर्य संस्कृति को सदैव गौरवान्वित करने के लिए अपने जीवन का हर क्षण जिया परन्तु आज भारतीय संस्क्रती को बर्बाद करने में लगे इन बाबाओ ने उस संत परम्परा को खोखला कर दिया है

परन्तु एक सवाल की ऐसे बाबा क्यों इतना जन समूह इकट्ठा कर लेते हैं......आइये जो मेने सोचा हैं इसका विशेष कारण ...................................@@@



इन बाबाओ के द्वारा अघोषित साम्राज्य स्थापित करने का सबसे बड़ा एकमात्र कारण हैं भारतीय जन मानस का वैदिक परम्परा से दूर हट जाना और उस आर्य संस्कृति को आम जनता
से दूर करने में एहम भूमिका धर्म के नाम पर चल रही दुकाने ने ही बनाई  है 

महर्षि दयानन्द ने वर्षो पहले वैदिक परम्परा को जीवित करने का जो ध्येय अपनाय था वो काफी हद तक अपने इस आर्य समाज के आंदोलन में सफल भी हुए जिसका परिणाम ये रहा की आज़ादी की जंग में लगभग 80 % क्रन्तिकारी आर्य समाज के विचारो से ही उतपन्न हुए और उस दौरान दयानन्द जी के खिलाफ तमाम इन पाखंडियो ने साजिशे रची और परिणाम ये हुआ की आखिर में विष देकर  दयानन्द जी को मौत के घाट उतार दिया  अफ़सोस आर्य समाज का हिन्दू धर्म सुधार कार्यक्रम फिर हर दिन कमजोर पड़ता गया और देश की राजनीती ने ऐसे ढोंगी बाबाओ को अपना वोट बैंक बनाने के चक्कर में उनको राजीनतिक व् आर्थिक सरंक्षण देना  शुरू कर दिया और उसके बाद बाबाओ ने पैसे के दम पर अपना प्रचार प्रसार जोरो से किया और एक तरफ आर्य समाज कमजोर पड़ता गया और ढोंगियों ने दुनिया को ये बताना शुरू कर दिया की  आर्य समाज ईश्वर को नहीं मानते और इस झूठ को फैलाकर उन्होंने खुद को भोली भाली जनता को स्वयं को भगवान बताना शुरू कर दिया  और इन बाबाओ के मकड़ जाल में जनता फंसती चली गयी व् वैदिक संस्कृति बर्बाद होती गयी और जनता उस वैदिक परम्परा को भूल गयी जिसे श्री कृष्ण प्रभु श्री राम ने जिया और जिसकी रक्षा की 



                            कुछ शब्दों में कहूं तो सीधा सा मतलब ये है की आर्य समाज के कमजोर होने व् बाबाओ से वोट बैंक के लालच ने ही ऐसे पाखण्डिओ को पैदा कर दिया और वैदिक भारतीय संस्कृति का नाश कर दिया 

       अब इन बाबाओ के अनुयायी इस तरह अंधे हो चुके हैं की बो बाबा के खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकते क्योकि बाबाओ ने बड़ी  माइंड को वाश कर दिया उनके सॉफ्टवेयर में पाखंड का वायरस बड़ी चालकी से डाल दिया जिसने उनके जीवन का पूरा सिस्टम करप्ट कर दिया और इसी बजह से उनके अनुयायी अनजाने में इन बाबाओ की ताक़त बन गए और इन बाबाओ ने अपने अनुययियो को छलना शुरू कर दिया 


                     और अनुयायी पर्दे के पीछे चल रहे बाबाओ के खेल को सारी जिंदगी समझ नहीं पाते हैं।
आप मेरे विचारो के बारे में क्या राय रखते कृपया निचे दिए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य बताएं व अच्छे लगे हों तो शेयर करें

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 choudhary sunnny arya
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