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भारतीय संत परम्परा की बर्बादी

ॐ कृण्वन्तो विश्वमार्यम ॐ गुरुमीत राम रहीम , रामपाल , आशाराम व कई संत जेल की सलांखो में आज पहुच गये हैं क्षमा चाहता हूँ मेने इन राक्षसों के लिए संत शब्द इस्तमाल किया ये तो दानव हैं......  परन्तु इन दानवों की लिस्ट काफी लम्बी है और फिलाल में जो दानव बड़े स्तर पर चमके हुए हैं वो हैं निर्मल बाबा और राधे माँ??? तो आइये कुछ झलक हम डालते हैं पुराणी भारतीय संस्क्रती के उन महान ऋषियों पर जिनकी बजह से हम बड़े गर्व से  कहते हैं की हम ऋषियों के वंशज हैं........ जैसे की महर्षि पतंजली, वाग्भट्ट जी,श्री अरविन्द घोष,ऋषि दयानन्द जी, ये लिस्ट बहुत लम्बी हैं पर इन्होने अपने जीवन को आदर्श के मूल्यों पर जिया और भारतीय आर्य संस्कृति को सदैव गौरवान्वित करने के लिए अपने जीवन का हर क्षण जिया परन्तु आज भारतीय संस्क्रती को बर्बाद करने में लगे इन बाबाओ ने उस संत परम्परा को खोखला कर दिया है परन्तु एक सवाल की ऐसे बाबा क्यों इतना जन समूह इकट्ठा कर लेते हैं......आइये जो मेने सोचा हैं इसका विशेष कारण ...................................@@@ इन बाबाओ के द्वारा अघोषित साम्राज...
15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ हमारा देश भारत, क्षमा चाहता हूँ आज़ाद नहीं गुलामी का तरीका बदला   - आज़दी आई या नहीं इसके लिए सभी के अपने अपने मत हो सकते हैं परन्तु आप अपने हृदय पर हाथ रख ये नहीं कह सकते की वास्तविक रूप से शहीदों के स्वप्न का भारत बना |  एक तरफ जहां अंग्रेजो ने लूट निति बनाई उसी लूट निति के आधार पर  भारत निरंतर 70 वर्षो से चला आ रहा है | हमारे देश का युवा ये तय नहीं कर पा रहा है कि सत्य क्या है वो राजनितिक चाल बाजियों में इस तरह फंसता जा रहा है की उसकी आँखों पर काली पट्टी बंध गयी है और राष्ट्र के एहम मुद्दों पर खुद को अनजान रखे हुए है |  

क्रांतिकारी राजगुरु

शिवराम हरि राजगुरु   भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। इन्हें भगत सिंह और सुखदेव के साथ २३ मार्च १९३१ को फाँसी पर लटका दिया गया था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में राजगुरु की शहादत एक महत्वपूर्ण घटना थी। शिवराम हरि राजगुरु का जन्म 24 अगस्त सन् 1908 में पुणे जिला के खेडा गाँव में हुआ था। 6 वर्ष की आयु में पिताका निधन हो जाने से बहुत छोटी उम्र में ही ये वाराणसीविद्याध्ययन करने एवं संस्कृत सीखने आ गये थे। इन्होंने हिन्दू धर्म-ग्रंन्थों तथा वेदो का अध्ययन तो किया ही लघु सिद्धान्त कौमुदी जैसा क्लिष्ट ग्रन्थ बहुत कम आयु में कण्ठस्थ कर लिया था। इन्हें कसरत (व्यायाम) का बेहद शौक था और छत्रपति शिवाजी की छापामार युद्ध-शैली के बडे प्रशंसक थे। वाराणसी में विद्याध्ययन करते हुए राजगुरु का सम्पर्क अनेक क्रान्तिकारियों से हुआ। चन्द्रशेखर आजाद से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी...

आखिर ये कृष्ण भगवान हैं कौन

पूरी पोस्ट पड़े  और कृष्ण के सच्चे स्वरूप को माने  आइये जाने कौनसा कृष्ण वास्तविक है और कौनसे कृष्ण के नाम पर  सिर्फ दुकान खोलकर लोग धंधा चला रहे हैं अगर आज आप कृष्ण भक्ति में रंगे हुए हैं तो इस बात को पहले जान लें कि आप किस कृष्ण को मान रहें हैं  चोक गये किस कृष्ण को कहने से ....... बात ही कुछ ऐसी हैं जो शायद कुछ को हजम न होगी ........  दोस्तो आज तक हर कथावाचक (लगभग 99%) और कुछ तथाकथित धर्म गुरु श्री कृष्ण को राधा का दीवाना और गोपियों के पीछे भागने वाला ही बताते हैं................ और वो इसी कारण अपनी दुकानें जम के चला रहे हैं और लम्बी कमाई कर रहे हैं कृष्ण के नाम  पर  और उनके इस सन्देश से आज के युवा ने कृष्ण को लव गुरु कहना शुरू कर दिया है मतलब हो क्या रहा है इस धर्म मे सब कुछ समझ से परे है .........  ये तो रहा एक कृष्ण जिसको खूब प्रचारित किया जा रहा है  अब मै बात करता हूँ दूसरे कृष्ण की ..........  दोस्तो जिस कृष्ण को योगेश्वर कृष्ण कहा जाता हो ज8सने गीता का उपदेश दिया हो जिसने धर्म की रक्षा के लिए कुरुक्षेत्र अपनाया...